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आशीर्वचन
...सुश्री रोशन दाते, जो अहिन्दी क्षेत्रकी है, ने हिन्दी में यह पुस्तक लिखकर अत्यन्त सराहनीय कार्य किया है । प्रबुद्धलेखिका ने अपनी दृष्टि पुरातत्व पर टिकाकर अनुसंधान का एक नया पथ प्रशस्त किया है । लेखिका ने पुरातत्व में नर्तकियों की मूर्ति को ‘करण’ और ‘हस्तकों’ के अध्ययन तक सीमित नहीं किया है अपितु देवी-देवताओं की मूर्तियोंमें, शालभंजिकाओं में, तोरण और शिला-पट्टपर बनी मूर्तियों में भी कत्थक की मूद्राओं को खोजा है । नायिका-भेद के साथ दूतियों के लक्षणों पर भी प्रकाश डाला है । साहित्य में वर्णित सोलह सिंगार तथा तत्सम्बन्धी आभूषणों के संदर्भ प्राचीन साहित्य से खोजे है । लेखिका ने हर प्रकार की मूर्तिओं को अपने अन्वेषण का विषय बनाया है और उसके सूक्ष्म से सूक्ष्म अंग का विश्लेषण अधिकारिक रूप में प्रस्तुत किया है । यह कार्य गहन चिन्तन के बिना कदापि सम्भव नहीं था । इससे लेखिका की प्रबुद्धचेतना का परिचय मिल जाता है कि लेखिका ने गम्भीर चिन्तन  के बाद समर्पित भाव से कार्यकिया है और कत्थक के साहित्य-जगत को एक नवीन परिवेश में प्रस्तुत कर साहित्य को समृद्धकिया है । ...
डा. ब्रजवल्लभ मिश्रा
नाट्यरत्न, रंगाचार्य, साहित्यभूषण,
राष्ट्रीय प्राध्यापक एवं भरतमुनिद्वारा
रिचत नाट्यशास्त्रके अनुवादक
Kathak-AadiKathak
Author Roshan Datye
Kathak-AadiKathak’ is an account of research work conducted on the interrelation of Contemporary & Traditional Kathak in reference to the Ancient Dance Sculptures as existing on the North Indian Temples & Medieval Miniature Paintings as available in Indian Museums. This book further provides clarification to the interconnection of Four Fine Arts ( Lalit Kala) namely: Nritya, Shilpa, Chitra,& Sahitya as they appear interwoven in each other while studying subjects of Dance Sculptures & Miniature Paintings. The book is useful to the students of Fine Arts (Dance, Sculpture, Painting Literature, Architecture) together with students of Arch- aeology as it has
more than 800 illustrative photographs to support descriptive write-ups.
Language: Hindi
No. of Pages: 340
Price: Rs. 600/-
plus Courier charges extra. (From 20th June 2014)

To purchase email us at roshandatye@gmail.com
कथक-आदिकथक पुस्तक की विशेषताएं
• नृत्य,शिल्प,चित्र, साहित्य, नाट्य, स्थापत्य आदि ललित कलाओं एवं पुरातत्व के अभ्यासकों के लिए उपयुक्त.
• प्राचीन वास्तूशिल्प, मूर्तिशल्प, मध्ययुगीन लघुचित्र और कथक नृत्य कलाकारों के 800 से अधिक छायाचित्रोंका अद्वितीय संकलन
• इस पुस्तक में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजराथ तथा मध्यप्रदेश के बौद्ध स्तूप, गुफा एवं प्राचीन मंदिरों का विचार किया है ।
• मूर्तिशल्प, लघुचित्र, नाट्यशास्त्र और संगीत रत्नाकर आदिग्रंथ और कथक नृत्य के दीर्घकालीन परस्पर संबंध, उनकी अभिव्यक्ती में दिखाई देने वाले समान-असमान तत्वोंपर आधारित वैशिष्ठ्यपूर्ण विवेचन.
Book Release: 4th December 2010 at S M Joshi Foundation Sabhagriha Pune.
Book release
(From L-R) Trustee Granthali Shri Sudesh Hingalaspurkar,
Guru Sharadini Gole, Dr. Kanak Rele, Guru Dr. Braj Vallabh Mishra,
Noted Archeologist Dr G B Deglurkar, Shree Gokhale, Roshan Datye.
Chief Guest, Padmashree
Dr. Kanak Rele, Mohini
Attam Dance Exponant,
Director Nalanda Dance Research Centre, Mumbai.
Speaker & Guest of Honour
Guru Dr. Braj Vallabh Mishra
कथक-आदिकथक पुस्तक में समाहित विषय
१) आदिमानव से नृत्य, चित्रऔर शिल्प कलाओं की उत्पत्ति
२) कथक एक स्त्रोत
३) नृत्त (i) चारी विधान
(ii) नृत्त हस्त
४) नृत्त करण
५) असाधारण नृत्यशिल्प
६) देवता
(i) अस्त्र, शस्त्र, प्रतीक
(ii) शिव प्रतिमा
(iii) देवी-स्वरूप-दुर्गा
(iv) गजलक्ष्मी
(v) गणपति
७) नायिका भेद
(i) वासकसज्जा,
(ii) खण्डिता,
(iii) विरहोत्कंठिता,
(iv) अभिसारिका,
(v) विप्रलब्धा,
(vi) स्वाधीनपतिका
८) नायिका सिंगार
९) नायिका सखी
१०) देवांगना अथवा सुरसुंदरी
(i) शालभंजिका
(ii) कपुर्रमंजिरी
(iii) आलसिका
(iv) शुकभासिका
(v) मुग्धा
११) वैशिष्टपूर्ण नृत्यमूर्ति

(i) नूपुरपादिका
(ii) वाद्यवादिनी
(iii) शस्त्रधारिणी
१२) रास
(i) रासलीला उद्गम एवं विकास
(ii) मंडलरास
(iii) कृष्णलीला
(iv) नृत्यगोपाल
१३) युगल प्रतिमा अर्थात छेडछाड
१४) नृत्य चित्र, शिल्पकला में प्रतिबंबित प्रकृति वणर्न
१५) उपसंहार
The title ‘Kathak-Aadikathak’ is composed of two words and attracts the attention of reader: the first word ‘Kathak’ hints at contemporary or the Kathak as danced today and second word ‘- Aadikathak’ derived out of Sanskrit word ‘Aadi’ meaning ‘Ancient’ hints at the Kathak as traditionally danced in Ancient-India. The front cover design shows the Dancers draped-in as per Contemporary Style & on back cover page in Traditional Ancient Style.
The topics covered in ‘Kathak-Aadikathak ’ includes sculptures from ancient temples, buddhist stupas & caves
in Rajasthan, Gujarat, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Manuscripts from Museums, Bharat Muni’s Natyashastra and Sangeet Ratnakar.
Credits are due to archeological Survey of India & Various Temple Trusts for permitting photography. Credits are due to Sangeet Natak Academy New Delhi and Kakasaheb Natu Foundation Pune for providing part financial assistance and to Granthali Mumbai for providing their Printing & Allied Facility for the publication of ‘Kathak-Aadikathak’.
TOPICS INCLUDED IN THE BOOK
1) Adi Manav Se Nritya, Chitra Aur Shilpa Kalaon ki Utpatti
2) Kathak Ek Srot
3) Nritta:
i) Chaaree Vidhaan
ii) Nritta Hasta
4) Nritta Karan
5) Asaadhaaran Nritya Shilpa
6) Devata:
i) Astra-Shastra-Pratik
ii) Shiv Pratima
iii) Devi- Swaroop-Durga
iv) Gajalaxmi
v) Ganapati
7) Naayika Bhed:
i) Vasaksajja
ii) Khanditaa
iii) Virhotkanthita
iv) Abhisarika
v) Vipralabdha
vi) Swadhinpatika
8) Nayika singaar
9) Nayika-Sakhii
10) Devangana Athava Sursundari
i) Shalabhanjika
ii) Karpuramanjiri
iii) Aalasika
iv) Shukabhasika
v) Mugdha
11) Vaishishtya Purna Nritya Murti:
i) Noopur padika
ii) Vadyavadini
iii) Shastra Dharini
12) Raas:
i) Raas Leela Udgam Evam Vikas
ii) Mandal Raas
iii)Krishna Leela
iv) Nritya Gopal
13) Yugal Pratima Arthaat Chhed Chhad
14) Nritya, Chitra, Shilpa Kala Mein Pratibimbit Prakriti Varnan
15) Upasanhar
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